वास्तु के अनुरूप कहां कैसे रंग करें
घर, जहां आकर हमारा मन बहुत सी परेशानियां होते हुए भी शांत हो जाता है। घर में हमें असीम सुख की प्राप्ति होती हैं। घर का वातावरण ही हमारे मन और विचारों को प्रभावित करता है। जैसा हमारे घर का वातावरण होगा वैसे ही हमारे विचार होंगे। कई घरों में लड़ाई-झगड़े, क्लेश आदि होता है, कई बार इन समस्याओं की वजह वास्तुदोष भी होता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की हर वस्तु हमें पूरी तरह प्रभावित करती है। घर की दीवारों का रंग भी हमारे विचारों और कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। हमारे घर का जैसा रंग होता है, उसी रंग के स्वभाव जैसा हमारा स्वभाव भी हो जाता है। इसी वजह से घर की दीवारों पर वास्तु के अनुसार बताए गए रंग ही रखना चाहिए।
रंगों का भी रिश्तों पर खासा असर होता है। घर की दीवारों के लिए हल्का गुलाबी, हल्का नीला, ब्राउनिश ग्रे या ग्रेइश येलो रंग का ही प्रयोग करें। ये रंग शांत और प्यार को बढ़ाने वाले हैं।
कहां कैसे रंग करें-
ड्राइंग रूम में सफेद, पिंक, क्रीम या ब्राऊन रंग श्रेष्ठ रहता है।
बेडरूम में आसमानी, पिंक या हल्का हरा रंग करवाना चाहिए।
डायनिंग रूम में पिंक, आसमानी या हल्का हरा रंग शुभ फल देता है।
कीचन में सफेद रंग सबसे अच्छा रहता है।
स्टडी रूम में पिंक, ब्राऊन, आसमानी या हल्का हरा रंग रखें।
लेटबाथ में सफेद या पिंक रंग रखना चाहिए।
1. पीला रंग सुकून व रोशनी देने वाला रंग होता है. घर के ड्राइंग रूम, ऑफिस आदि की दीवारों पर यदि आप पीला रंग करवाते हैं तो वास्तु के अनुसार यह शुभ होता है.
2. अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए आपको अपने कमरे की उत्तरी दीवार पर हरा रंग करना चाहिए.
3. आसमानी रंग जल तत्व को इंगित करता है. घर की उत्तरी दीवार को इस रंग से रंगवाना चाहिए.
4. घर के खिड़की दरवाजे हमेशा गहरे रंगों से रंगवाएँ. बेहतर होगा कि आप इन्हें डार्क ब्राउन रंग से रंगवाएँ.
5. जहाँ तक संभव हो सके घर को रंगवाने हेतु हमेशा हल्के रंगों का प्रयोग करें.
कुछ वास्तु टिप्स
1. बैठक के कमरे में द्वार के सामने की दीवार पर दो सूरजमुखी के या टूलिप के फूलों का चित्र लगाएँ.
2. घर के बाहर के बगीचे में दक्षिण-पश्चिम के कोने को सदैव रोशन रखें.
3. घर के अंदर दरवाजे के सामने कचरे का डिब्बा न रखें.
4. घर के किसी भी कोने में अथवा मध्य में जूते-चप्पल (मृत चर्म) न रखें.
5. जूतों के रखने का स्थान घर के प्रमुख व्यक्ति के कद का एक चौथाई हो, उदाहरण के तौर पर 6 फुट के व्यक्ति (घर का प्रमुख) के घर में जूते-चप्पल रखने का स्थल डेढ फुट से ऊँचा न हो.
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